भारत में इस साल रिकॉर्ड पैदावार का अनुमान लेकिन चीन में भूखमरी की आशंका, खाना बर्बादी भी प्रमुख कारण


नई दिल्ली2 घंटे पहले

सरकारी ीडिया आंकड़ों के ुताबिक चीन के लोगों ने 2015 ें बड़े शहरों ें 17 से 18 टन तक का खाना बर्बाद किया है

  • अच्छे मानसून के चलते साल खरीफ सीजन में बुआई का रकबा 1104 लाख करोड़ हेक्टेयर हो गया है
  • आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक ारत में कृषि उत्पादन पिछले दो सालों में बढ़कर 114 लाख टन हो गया है

भारत में इस साल अच्छे मानसून के चलते खरीफ फसलों की बुआई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। क्रिसिल रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में खरीफ फसलों की बुआई का रकबा 1104 लाख हेक्टेयर हो गया है। जबकि चीन सहित दुनिया के कई देशों के सामने अनाज आपूर्ति की समस्या खड़ी हो सकती है। इसके पीछे बढ़ती आबादी, घटते कृषि उत्पादन के अलावा खाने की बर्बादी है।

जनसंख्या के मामले में दुनिया के दो शीर्ष देश चीन और भारत में इस साल कृषि उत्पादन की परिस्थितियां बेहद अलग हैं। कोरोना संकट के बीच जहां भारत में खरीफ फसलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का अनुमान है, तो वहीं चीन में बढ़ती आबादी और घटते कृषि उत्पादन से अनाज आपूर्ति दिक्कत पैदा हो सकती हैं।

चीन में घटता खेती का रकबा

पहले बात करते हैं चीन कि, दुनिया की 22 फीसदी आबादी चीन में रहती है। लेकिन खेती का रकबा 33.Four करोड़ एकड़ है, जो विश्व की केवल 7 फीसदी कृषि योग्य भूमि है। आंकड़ों के मुताबिक चीन जब से आजाद हुआ है तब से अबतक करीब 20 फीसदी खेती की जमीन इंडस्ट्रीयल ग्रोथ और शहरी के लिए इस्तेमाल कर चुका है। वर्तमान में चीन के पास 10-15 प्रतिशत खेती योग्य जमीन बची है। हालांकि राहत की बात यह है कि चीन में प्रति एकड़ पैदावार अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा है। क्योंकि चीन खेती के लिए दुनिया में सबसे अधिक फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करता है।

लेकिन चीन को आने वाले दिनों में क्यों होगी खाने की किल्लत –

1. 2030 तक चीन की कुल आबादी 1.5 अरब तक हो जाएगी। इसके बाद हर साल देश में अनाज की खपत प्रति वर्ष 10 करोड़ टन बढ़ जाएगी।
2. चीन की मिनिस्ट्री ऑफ इमरजेंसी मैनेजमेंट के मुताबिक इस साल बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से धान, गेहूं और अन्य प्रमुख फसलों पर बुरा असर पड़ा है।
3. इसके अलावा बढ़ते इंडस्ट्रियल ग्रोथ के कारण देश में खेती योग्य भूमि का रकबा भी लगातार घट रहा है। जिससे कृषि उत्पादन के आंकड़े भी आने वाले दिनों में कम होंगे।
4. चीन में फूड वेस्टेज सबसे ज्यादा होता है। चीन की सरकारी मीडिया आंकड़ों के मुताबिक चीनी लोगों ने साल 2015 में बड़े शहरों में 17 से 18 टन तक खाना बर्बाद किया है।
5. कोरोना संकट के बीच दुनियाभर के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों ने अनाज एक्सपोर्ट को रोक दिया है। इसमें भारत, वियतनाम, ब्राजील और रूस जैसे अन्य देशों ने गेहूं, धान सहित अन्य प्रमुख फसलों के एक्सपोर्ट को रोक दिया है।

हालांकि चीन की सरकार इसे पश्चिमी देशों की मीडिया का प्रोपगेंडा कहा है। उनका कहना है कि यह फेक न्यूज है। चीन में खाने की कोई दिक्कत नहीं है और न ही उत्पादन में कमी आई है।

भारत में रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान

अब भारत की बात करते हैं, जनसंख्या के मामले में चीन के बाद भारत की हिस्सेदारी है। दुनिया की 18 फीसदी आबादी भारत में रहती है। देश में इस साल कृषि क्षेत्र में हल्की ग्रोथ देे को मिली है। बुआई का रकबा खरीफ सीजन में बढ़ा है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक अच्छे मानसून के चलते इस साल खरीफ सीजन में बुआई का रकबा सालाना आधार पर 5.7 फीसदी बढ़ा है। यानी अब खरीफ फसलों का रकबा बढ़कर 1104 लाख करोड़ हेक्टेयर हो गया है। जिससे कृषि उत्पादन में भी अच्छी बढ़त का अनुमान है।

दो वर्षों में कृषि उत्पादन Four फीसदी बढ़ा

भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश में कृषि योग्य भूमि 50 फीसदी है। वैश्विक स्तर पर गेहूं और चावल के उत्पादन में भारत शीर्ष देशों में शामिल है। पिछले दिनों जारी आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में भी कहा गया था कि भारत में कृषि उत्पादन पिछले दो सालों में बढ़कर 114 लाख टन हो गया है। यानी सालाना आधार पर कृषि उत्पादन में Four फीसदी की ग्रोथ हुई है। इसके अलावा भारत सरकार भी लगातार कृषि सेक्टर को बूस्टअप करने की ओर सकारात्मक कदम उठाती रही है।

दुनियाभर में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ीं हैं

कोविड-19 के प्रकोप से पहले भी वैश्विक संस्थाओं ने खाने की किल्लत पर चिंता जताई थी। पिछले साल अफ्रीका से दुनियाभर में फैले स्वाइन फ्लू बीमारी से सुअरों (जानवर) की आबादी में कमी आई थी। इससे चीन में इस साल सालाना आधार पर खाने की कीमतें 15-22 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। इसके अलावा पूर्वी अफ्रीका और कुछ एशियाई देशों में टिड्डी के प्रकोप से फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसमें भारत सहित पाकिस्तान जैसे देश भी शामिल थे। वहीं केन्या में 2019 के बाद से लोकल फूड मक्का की कीमत में 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर लगे प्रतिबंध से लेबर की समस्या के कारण कृषि कार्य प्रभावित हुआ है। इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन में कमी के कारण भी खाने का सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच नहीं पा रहा है। जिससे कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। यह हाल विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी है। इससे अमीर और गरीब के बीच एक बड़ी खाईं तैयार हो रही है।

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