निवेशकों की शिकायतों को निपटाने के लिए सेबी अब एजेंसी की करेगी नियुक्ति, ऑन लाइन ट्रैक होंगी शिकायतें


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मुंबई7 घंटे पहले

  • चुने गए कॉन्ट्रैक्टर का सालाना औसत टर्नओवर पिछले तीन सालों में कम से कम 55 लाख रुपए का होना चाहिए
  • सेबी को प्राप्त होने वाली शिकायतों को दो साल तक सुरक्षित रखने के लिए एक उचित स्टोरेज फैसिलिटी भी कांट्रैक्टर को रखना होगा

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने निवेशकों से मिलने वाली शिकायतों के रिकॉर्ड को मेंटेन करने और उनकी प्रॉसेस को लेकर एक एजेंसी नियुक्त करने की योजना बनाई है। यह एजेंसी निवेशकों से फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शिकायतें प्राप्त करेगी। उन्हें कैटेगराइज करेगी। सेबी ने एक नोटिस में यह जानकारी दी है। सेबी ने ​गठित की जाने वाली एजेंसी के प्री क्वालिफिकेशन को लेकर आवेदन आमंत्रित किए हैं।

शिकायतों को लाइन ट्रैक करने की जिम्मेदारी होगी

सेबी ने कहा कि एजेंसी शिकायतों का स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक करने की जिम्मेदारी भी संभालेगी और फॉलो अप भी करेगी। इससे निवेशकों की शिकायतों का निपटारा जल्द होगा। सेबी ने एक नोटिस में यह जानकारी दी है। सेबी ने ​गठित की जाने वाली एजेंसी के प्री क्वालिफिकेशन को लेकर आवेदन आमंत्रित किए हैं। जानकारी के मुताबिक इसके अलावा एजेंसी एक्शन टेकन रिपोर्ट्स (एटीआर) भी तैयार करेगी और शिकायतों का स्टेटस सेबी के प्लेटफॉर्म स्कोर्स पर भी अपडेट करेगी।

पहले से बना हुआ है स्कोर्स

बता दें कि सेबी का स्कोर्स शिकायतों को निपटाने के लिए बना हुआ है। यह लिस्टेड कंपनियों या इंटरमीडियरीज के खिलाफ निवेशकों की शिकायतों को रजिस्टर और ट्रैक करता है। एजेंसी के काम में शिकायतों को इंटरमीडियरीज या कंपनियों तक पहुंचाना और एक्नॉलेजमेंट लेटर्स को निवेशकों को भेजना भी शामिल रहेगा। सेबी के मुताबिक इच्छुक एजेंसी 5 अक्टूबर तक आवेदन जमा कर सकती है।

चुनी गई एजेंसी के लिए यह होगी शर्त

चुनी गई एजेंसी, सेबी को प्राप्त होने वाली शिकायतों को दो साल के लिए सुरक्षित रखने के लिए एक उचित स्टोरेज फैसिलिटी के लिए भी जिम्मेदार होगी। यही नहीं, एजेंसी को और भी काम करने होंगे जिसमें निवेशक जागरुकता और निवेशक की शिकायत निवारण से संबंधित कोई भी अन्य काम आएगा। सेबी ने कहा है कि एजेंसी के पास रजिस्ट्रार हैंडलिंग व ट्रान्सफर एक्टिविटीज या डिपॉजिटरी सर्विसेज के क्षेत्र में विशेषज्ञता होनी चाहिए या फिर निवेशकों के मामलों को संभालने का अनुभव होना चाहिए।

एजेंसी ने पहले इस तरह की सेवाएं पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, पब्लिक सेक्टर बैंकों, वित्तीय संस्थानों, लिस्टेड कंपनियों आदि को उपलब्ध कराई हों। कॉन्ट्रैक्टर का सालाना औसत टर्नओवर पिछले three सालों में कम से कम 55 लाख रुपए का होना चाहिए। उसे मार्च 2020 तक पिछले 5 सालों में से लगातार दो साल उसे कोई नुकसान न हुआ हो।



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