दुनिया की दिग्गज तेल कंपनियां भावी विकास के लिए हाइड्रोजन पर लगा रही हैं दांव


नई दिल्लीएक घंटा पहले

ाइड्रोजन एनर्जी स्टोरेज समस्या का समाधान दे सकता ै और आगे चलकर यह िवहन क्षेत्र की मांग को भी पूरा कर सकता है

एशिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनिंग कंपनियों में से एक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) अपने कारोबारी भविष्य की सुरक्षा के लिए हाइड्रोजन की ओर देख रही है। कंपनी के चेयरमैन श्रीकांत माधव वैद्य ने कहा कि आईओसी दिल्ली में 50 ऐसी बसों का परिचालन करेगी, जिनमें ईंधन के रूप में हाइड्रोजन और सीएनजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इन बसों का परिचालन इसी साल शुरू हो सकता है।

इन बसों के परिचालन से कंपनी को एक नया बाजार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से हाइड्रोजन का भविष्य का ईंधन बताया जा रहा है। फिलहाल देश में बिकने वाले कुल ऑयल प्रोडक्ट्स में आईओसी का करीब आधा योगदान होता है।

पोजिशनिंग बदलने की कोशिश कर रहा है तेल उद्योग

इस सप्ताह एसएंडपी ग्लोबल प्लैट्स एशिया पैसिफिक पेट्रोलियम कांफ्रेंस में दुनिया की कुछ सबसे बड़ी रिफाइनिंग, ड्र्रिलिंग और ट्रेडिंग कंपनियों ने जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए हाइड्रोजन को काफी महत्वपूर्ण बताया। इससे यह संकेत मिल रहा है कि महामारी के बाद मांग घटने और शेयरधारकों द्वारा ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी लाने की आवाज उठाए जाने के बाद तेल उद्योग अपनी पोजिशनिंग को बदलने की कोशिश कर रही है।

अभी से 2050 तक हाइड्रोजन ईंधन में 10 गुने की बढ़ोतरी हो सकती है

दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट ऑयल ट्रडिंग कंपनी विटॉल ग्रुप के रिसर्च सेगमेंट के ग्लोबल हेड जियोवानी सेरियो ने कहा कि हाइड्रोजन अभी तेल उद्योग के लिए सबसे ज्यादा डिसरप्टिव रहा है। अभी से 2050 तक हाइड्रोजन ईंधन में 10 गुने की बढ़ोतरी हो सकती है। यह एनर्जी को स्टोर करने की समस्या का समाधान दे सकता है और आगे चलकर यह परिवहन क्षेत्र की मांग को पूरा कर सकता है।

रिन्यूएबल सोर्स से हाइड्रोजन उत्पादन करने पर ग्रीन हाउस गैस नहीं बनती

ब्लूमबर्ग एनईएफ के मुताबिक 2050 तक वैश्विक ऊर्जा जरूरत की एक चौथाई की आपूर्ति करने के लिए हाइड्रोजन के प्रोडक्शन, स्टोरेज और ट्र्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में करीब 11 लाख करोड़ डॉलर का निवेश करना होगा। वैद्य ने कहा कि हाइड्र्रोजन की खास बात यह है कि इसका ऊर्जा घनत्व काफी ज्यादा है, कई स्रोतों से इसका उत्पादन हो सकता है और इसके उपयोग का दायरा काफी व्यापक है। यदि नवीकरणीय ऊर्जा से हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाए, तो इससे ग्रीन हाउस गैस को कोई उत्पादन नहीं होता है। हालांकि अभी इसका अधिकांश उत्पादन प्रदूषणकारी तरीकों से हो रहा है।

हाइड्रोजन को मुख्य भूमिका में आने में अभी एक दशक लग सकता है

हालांकि हाइड्रोजन को लेकर हर कोई इतना ही उत्साहित नहीं है। सिटीग्रुप के कमोडिटी रिसर्च के ग्लोबल हेड ईड मोर्स ने कहा कि हाइड्रोजन उत्पादन की लागत में अभी भी बहुत कमी नहीं आई है। सुरक्षा की भी समस्या है। पिछले साल दक्षिण कोरिया और नॉर्वे में कुछ हाइड्र्रोजन टैंकों में विस्फोट हो गया था। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन को मुख्य भूमिका में आने में करीब एक दशक और लग सकता है।

कई वैश्विक ऑयल कंपनियां हाइड्रोजन में तलाश रही हैं भविष्य

इंडियन ऑयल के अलावा कुछ और कंपनियां हैं, जो हाइड्रोजन में संभावना तलाश रही हैं। चीन की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी साइनोपेक बीजिंग के आसपास स्थित अपने कुछ रिटेल फ्यूल स्टेशनों में हाइड्रोजन का उपयोग भी करने जा रही है। चीन अगले एक दशक में 10 लाख फ्यूल-सेल व्हीकल को सड़क पर उतारना चाहता है। नॉर्वे की इक्विनोर एएसए एक बड़ी कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज फैसिलिटी का निर्माण कर रही है। यह भविष्य में हाइड्र्रोजन का एक स्रोत बन सकता है। बीपी सिंगापुर पीटीई लिमिटेड के वीओओ यूजेन लियोंग ने कांफ्रेंस में कहा कि बीपी पीएलसी हाइड्रोजन एनर्जी प्रोडक्शन और ग्रीन अमोनिया को विकास के नए क्षेत्र के रूप में देखती है।

हाइड्रोजन सबसे पहले प्राकृतिक गैस बाजार को डिसरप्ट करेगा

विटॉल के सेरियो ने कहा कि हाइड्रोजन पहले प्राकृतिक गैस बाजार को डिसरप्ट कर सकता है और उसके बाद वाहन उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। यह एनर्जी स्टोरेज की समस्या का भी समाधान दे सकता है। हालांकि यह सब इतना आसान नहीं होगा।

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