Enterprise Concepts Throughout Lockdown; Punjab Man From Mohali Construct Wood Bicycles | कोरोना काल बना वरदान;लॉकडाउन में घर पर बोर हुए तो बना डाला वुडन साइकिल,अब मिलने लगे ऑर्डर


जीरकपुरFour घंटे पहले

धनीरा ने बताया कि अब अगले साइकिलों ें वह रि भी वुडन ही तैयार करेंगे। कस्टमर अपनी पसंद से कस्टमाइज भी करवा सकता है। बोले,फ्यूचर ें साइकिल ाने का काम जारी रखेंगे।

  • 27 जुलाई के बाद से 5 अगस्त तक बेच चुके हैं चार साइकिल,आठ के ऑर्डर और
  • अभी उन्होंने 22 और 20 इंच साइकिल तैयार किए हैं,बच्चों के लिए कम हाइट के करेंगे तैयार

(आरती एम अग्निहोत्री).कोरोना काल में भले ही कई लोगों का रोजगार छिन गया और कईयों के बिजनेस में डाउनफॉल हुआ है। किसी के पास पैसा नहीं रहा, किसी का चैन गायब हो गया। डिप्रेशन में आकर कईयों ने सुसाइड जैसा कदम उठा लिया। लेकिन जीरकपुर के बभात गांव के 40 साल के धनीराम धीमान के लिए कोरोना काल किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ है। 25 साल से वुडन इंटीरियर्स का काम करते हैं, इसलिए क्रिएटिविटी से तो पुराना रिश्ता था ही। वहीं यह भी सोचा कि खाली बैठ कर दिमाग खराब करने से अच्छा है खुद को बिजी करना और इसी चक्र में एक वुडन साइकिल तैयार कर डाली। अभी तक चार साइकिल सेल कर चुके हैं और eight के ऑर्डर और हैं जिन्हें वह तैयार कर रहे हैं।

वुडन साइकिल बनाने का आइडिया मन में कैसे आया? इसपर धनीराम धीमान बताते हैं कि लॉकडाउन होने के बाद 4-5 दिन वह फ्री बैठे तो बोर हो गया। मन में विचार आया कि अगर इसी तरह फ्री बैठा रहूंगा तो दिमाग खराब ही होगा। तभी एक बहुत पुराना विचार मन में आया। सोचा कि जो वुडन साइकिल खुद के लिए बनाने के लिए सोच रहा था क्यों न वो साइकिल ही बना लूं। बताते हैं कि घर में मेरे पास स्क्रैप तो था ही। इसलिए मैंने काम शुरू करने में देरी नहीं की। पहला साइकिल बनाने में चार महीने का वक्त गया। पहला साइकिल पूरा प्लाईवुड में बनाया जो ज्यादा सफल नहीं हुआ। उसके बाद अगल साइकिल कैनेडियन कैल वुड से बनाया। पिछले साइकिल में जो कमियां थीं,उसे इस साइकिल में सुधारा। फिर फाइनल टच दिया और साइकिल तैयार हो गया। अब वह एक हफ्ते में एक साइकिल तैयार कर रहे हैं।

कस्टमाइज करवा सकते हैं साइकिल

एक साइकिल में चार हजार रुपए तक की लक्कड़ यूज होती है। इसके अलावा ब्रेक्स और टायर वह खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि अभी उन्होंने 22 और 20 इंच साइकिल तैयार किए हैं। अब उनके खुद के और रिश्तेदारों के बच्चे भी इस साइकिल की जिद्द कर रहे हैं। ऐसे में अब बच्चों के लिए वह 16 व 18 इंच के साइकिल तैयार करेंगे। धनीराम ने बताया कि अब अगले साइकिलों में वह रिम भी वुडन ही तैयार करेंगे। कस्टमर अपनी पसंद से कस्टमाइज भी करवा सकता है। बोले,फ्यूचर में साइकिल बनाने का काम जारी रखेंगे।

जहां एक घंटे में पहुंचते हैं, वहां पहुंचने में चार घंटे लगे

धनीराम ने बताया कि उनका एक दोस्त पीजीआई में काम करता है। उसने मेरे साइकिल को देखकर अपने बॉस राकेश कुमार को दिखाया। वह मेरे पास साइकिल देखने आए और 15 हजार रुपए में इसे खरीदकर ले गए। 27 जुलाई को उन्होंने साइकिल खरीदा और उसके बाद तीन और साइकिल बिक गए। आठ ऑर्डर उनके पास और हैं और अब पंजाब के मुक्तसर,बरनाला से भी उनके पास साइकिल बनाने के ऑर्डर आ रहे हैं। धनीराम ने बताया कि वह जीरकपुर से राकेश कुमार के घर सेक्टर 24 चंडीगढ़ ये साइकिल छोड़ने गए। अमूमन वहां तक पहुंचने में साइकिल से एक घंटा लगता है,लेकिन वह चार घंटे में पहुंचे। रास्ते में लोगों ने उन्हें रोककर सेल्फी ली, साइकिल के बारे में पूछा। लोग साइकिल को देखकर काफी क्रेजी हो गए। इसलिए उनका रास्ते में इतना वक्त खर्च हो गया।

कोरोना काल में महंगी गाड़ियों से ज्यादा कीमती हुए साइकिल

कोरोना को लेकर जब भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया लॉकडाउन में चली गई तो उस समय लग्ज़री गाड़ियां पड़ी-पड़ी धूल फांकने लगी। बेशक पेट्रोल के दाम गिर गए लेकिन कोरोना का डर इतना कि पेट्रोल पंप तक जाने के नाम से भी लोगों की जान सूख रही थी। इसी दौरान, अचानक साइकिल इन महंगी गाड़ियों से भी ज्यादा कीमती लगने लगी। जिनके पास साइकिल है, वे निश्चिंत होकर आज इसका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं।और जिनके पास नहीं थी, वे या तो इसे खऱीद चुके हैं या फिर खऱीदने का मन बना चुके हैं।

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