अंकोरवाट मंदिर वाले राज्य ने कुत्ते के मांस के कारोबार पर लगाया बैन


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कुत्ते (Canine) के मांस के कारोबार को अमानवीय और खतरनाक बताने के साथ यह भी कहा गया है कि इससे बीमारियां फैल सकती हैं.

नोम पेन्ह. में () के लिए प्रसिद्ध सिएम रीप प्रांत में कुत्ते (Canine) के मांस के कारोबार को प्रतिबंधित कर दिया गया है. पशु अधिकार समूहों का कहना था कि इस क्षेत्र में कुत्ते के मांस के कारोबार में खासी वृद्धि हुई है. सिएम रीप प्रांत में अधिकारियों ने सोमवार को कुत्ते के मांस खरीदने, बिक्री और खाने के लिए कुत्तों के मारे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया. हालांकि देश के अन्य हिस्सों में अब भी इसका कारोबार वैध है. दो पशु कल्याण समूहों ने एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि प्रत्येक साल कंबोडिया में 20 लाख से तीस लाख कुत्ते मांस के लिए मारे जाते हैं और सिएम रीप जानवरों की आपूर्ति का मुख्य स्रोत है और कभी-कभी तो यहां पालतू जानवर भी चुरा लिए जाते हैं.

प्रतिबंध लगाने का संबंध पर्यटन स्थल के रूप में सिएम रीप की लोकप्रियता और पवित्र स्थल होने से जुड़ा है. अंकोरवाट में सालाना 20 लाख से ज्यादा लोग आते हैं. हालांकि कोरोना वायरस महामारी की वजह से यहां पर्यटक अभी नहीं आ रहे हैं. आदेश में कहा गया है कि कुत्ते वफादार जानवर हैं और वे घरों तथा खेतों की रक्षा करते हैं. कुत्ते के मांस के कारोबार को अमानवीय और खतरनाक बताने के साथ यह भी कहा गया है कि इससे बीमारियां फैल सकती हैं. हालांकि कंबोडिया के पुराने लोग आम तौर पर कुत्ते का मांस नहीं खाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे दुर्भाग्य आता है लेकिन युवा लोगों में यह फैशन बन रहा है.

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पानी में डूबा हुआ मंदिर का बगीचाअंकोरवाट का पुराना नाम यशोधपुर था. मीकांक नदी के किनारे सिमरिप शहर में बसे इस मंदिर को टाइम मैगजीन ने दुनिया के पांच आश्चर्यजनक चीजों में शुमार किया था. इसका फैलाव सैंकड़ों वर्ग मील में है. यह मंदिर जगत के पालनहार विष्णु भगवान को समर्पित है. जबकि इससे पूर्व के शासकों ने यहां बड़े-बड़े शिव के मंदिरों का निर्माण करवाया था. इंडोनेशिया के निवासी इस मंदिर को पानी में डूबा हुआ मंदिर का बगीचा भी कहते है. अंकोरवाट का यह हिन्दू मंदिर इतना खास है कि यह कम्बोडिया राष्ट्र का राष्ट्रीय प्रतीक है, जिसकी तस्वीर को यहां के राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित किया गया है. यह मंदिर मेरु पर्वत का प्रतीक भी माना जाता है.

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