क्या है चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति, जिससे सभी कर रहे हैं होशियार


Ladakh में भारत और चीन (India-China) के बीच सीमा पर तनाव (Border Pressure) की स्थिति से निपटने के लिए जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर जारी है, वहीं भारत के आर्मी प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति से सावधान रहने की ज़रूरत बताई है. Common Rawat ने हालात को चिंताजनक बताते हुए हर स्थिति के लिए तैयार रहने की बात के दौरान जिस सलामी स्लाइसिंग रणनीति का ज़िक्र किया, उसके बारे में जानने से इतिहास से लेकर वर्तमान तक की समझ साफ होती है.

आखिर क्या है सलामी स्लाइसिंग?
सेना की ज़ुबान में कहें तो, सलामी स्लाइसिंग का अर्थ उस रणनीति से है, जिसके ज़रिये कोई देश धमकी और समझौतों की प्रक्रिया में बांटो और जीतो का खेल खेलते हुए नए क्षेत्रों पर अपना कब्ज़ा करता है. विकिपीडिया की मानें तो इस रणनीति में कई छोटे छोटे गुप्त एक्शन लिये जाते हैं क्योंकि इन्हें एक साथ या खुले तौर पर ज़ाहिर करना गैर कानूनी या मुश्किल होता है. कुल मिलाकर यह किसी भी देश के ​दामन पर एक दाग जैसा होता है.

सलामी स्लाइसिंग शब्द का पहली बार प्रयोग हंगरी के कम्युनिस्ट नेता Matyas Rakosi ने 1940 क दशक में किया था, जब उन्होंने गैर कम्युनिस्ट पार्टियों को सलामी स्लाइस (सामान्यतया सूअर के मांस से बनी डिश) की तरह काट देने के उदाहरण से अपनी नीति को समझाया था. सेनाओं की शब्दावली में इसे ‘कैबेज स्ट्रैटजी’ भी कहा जाता है.

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत. फाइल फोटो.

कैसी है चीन की सलाम स्लाइसिंग रणनीति?
दूसरे विश्व युद्ध के बाद सिर्फ चीन ही ऐसा देश है जो ज़मीन और समुद्र में अपनी सीमाएं लगातार बढ़ाने के लिए चालें चलता रहा है. तिब्बत का अधिग्रहण, अक्साई चिन पर कब्ज़ा और पैरासल आईलैंड को हथिया लेना चीन के विस्तारवाद की नीति का हिस्सा रहा है. अपने पड़ोसी देशों की सीमाओं पर लार टपकाने वाले चीन की इस नीति में हर तरफ एक पैटर्न दिखाई देता है.

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क्या है सीमा कब्ज़ाने का चीन का पैटर्न?
भारत ही नहीं बल्कि तमाम पड़ोसी मुल्कों के साथ चीन सीमाएं हथियाने के लिए पहले किसी क्षेत्र विशेष पर अपना दावा करता है. फिर हर मुमकिन मौके और मंच पर उसे ज़ोर से दोहराता है. इससे एक विवाद और तनाव का माहौल बन जाता है और फिर समझौते के लिए संवाद की प्रक्रिया शुरू होती है. फिर विवाद को सुलझाने के लिए चीन सैन्य बल और कूटनीतिक ताकत का सहारा लेता है.

भारत में चीन सलामी स्लाइसिंग रणनीति
दक्षिणी तिब्बत की सीमाओं से सटे भारत के अरुणाचल प्रदेश समेत करीब 90 हज़ार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर चीन कब्ज़े की मंशा रखता रहा है. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर में भी चीन कुछ हिस्सों पर अपने बेतुके दावे कर एक तरह का प्रोपेगैंडा खड़ा करने की कोशिश करता रहा है.

जम्मू और कश्मीर में काराकोरम के उत्तर का करीब 6000 वर्ग किमी का हिस्सा पाकिस्तान से चीन कब्ज़ा चुका है. इसके साथ ही, सिक्किम स्थित डोकलाम पर चीन की नज़र रही है क्योंकि इस हिस्से पर कब्ज़ा कर लेने से चीन सिलीगुड़ी कॉरिडोर या ‘चिकन नेक’ पर नज़र रख सकता है यानी उस हिस्से पर जो उत्तर पूर्व भारत को शेष भारत से जोड़ता है.

चीन की सलामी स्लाइसिंग की कहानी
सीमाओं पर विस्तार की चीन की इस रणनीति को सलामी स्लाइसिंग के तौर पर समझा जाता है. 1948 तक तिब्बत बौद्धों का एक स्वतंत्र भूभाग था, लेकिन इसके बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने तिब्बत का पूरा राज्य हड़पने के लिए इस रणनीति का सहारा लिया. तिब्बत के साथ ही लद्दाख के पूर्व और तिब्बत के पश्चिम में बसे झिनझियांग क्षेत्र को भी कब्ज़ा कर चीन ने अपना नक्शा दोगुना कर लिया.

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तिब्बत और झिनझियांग के क्षेत्र कब्ज़ाने से चीन का नक्शा दोगुना बड़ा हुआ. तस्वीर Pixabay से साभार.

साल 1962 के युद्ध के चलते चीन ने भारत के बड़े भूभाग पर कब्ज़ा करने की रणनीति अपनाई. हालांकि तब चीन ने अपनी सेनाएं कुछ पीछे हटाईं लेकिन तबसे आधुनिक स्विटज़रलैंड के आकार के बराबर अक्साई चिन पर अपना दावा करना शुरू किया. इस हिस्से को पूरी तरह कब्ज़ाने के लिए चीन ने कई चालें चलीं जैसे हान समुदाय के लोगों को लगातार इस इलाके में भेजा ताकि वो भारतीय गड़रियों को यहां से खदेड़ सकें.

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हिमालयीन क्षेत्रों में तिब्बत और भारत के क्षेत्रों तक ही नहीं, बल्कि चीन 1974 में वियतनाम से पैरासल आईलैंड, 1988 ​में जॉनसन रीफ, 1995 में फिलीपीन्स से मिसचीफ रीफ और 2012 में स्कारबोरो शोअल को ​हथियाने के लिए भी इसी सलामी स्लाइसिंग का प्रयोग करता रहा. अब भी जापान के कुछ हिस्सों पर दावा कर आक्रामक प्रोपेगैंडा को चीन हवा दे रहा है.

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